Friday, April 29, 2022

संतोष मोदी, जोरहाट शाखा, असम प्रांत

पर्यावरण 


तपते सूरज की प्रखर किरणें,

जिनसे झुलस रही धरती !

लाल हो गया सिन्दूरी गोला,

त्राहि त्राहि कर रही प्रकृति !


प्रकृति से की छेड़खानी,

वायुमंडल हो गया दूषित !

गुस्से से सूर्य तमतमा उठा,

हो गया संसार पे कुपित !


हमारी गलती की सजा,

हम खुद ही भुगत रहे !

पेङ पौधों से विहीन धरा,

ऑक्सीजन को तरस रहे !


हे इंसान अब भी संभल जाओ,

प्लास्टिक का बहिष्कार करो !

स्वच्छ सुंदर देश बनाओ,

नदियों को न दूषित करो !


संकल्प करें हम सब मिलकर,

एक नया पेड़ लगाएँगे हम !

धरा हमारी निर्मल होगी,

सुख से जी पाएंगे हम !

- श्रीमती संतोष मोदी, जोरहाट शाखा, असम प्रांत 

No comments:

Post a Comment