Tuesday, April 19, 2022

पायल अग्रवाल मुजफ्फरपुर शाखा, बिहार प्रदेश

कलियों ने ली अंगड़ाई,

गुल खिले गुलशन-गुलशन

महक उठी फुलवारी.....

देख रे सखी री आई री 

बसंत ऋतु आई.....

सुनहरी ओढ़नी ओढ़ के

खेतों में पीली सरसों लहराई

मीठे-मीठे रस से भर गई

बगीची में अमराई....

देख रे सखी री आई री आई बसंत ऋतु आई......

मधुर संगीत कोकिल के गुंजे

पतझड़ का कर अंत 

बहार बन झुम उठी ऋतुओं की रानी....

देख रे सखी री आई री आई बसंत ऋतु आई


साहित्य प्रमुख 

"पायल अग्रवाल"

बिहार प्रदेश मुजफ्फरपुर शाखा

8544320267

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