Saturday, February 17, 2024

बिहार : काव्यांजली

 

कीव

रूसी सेना राजधानी कीव के

बूचा शहर पर कत्लेआम मचाया

ले निर्दोषों की जान लासों का जाल बिछाया

क्या मासूमों का खून बहा कर ,होगा समस्या का समाधान

सड़कों पर बिखरे पड़े लाशों के ढेर

यातनाएं दे देकर तब्दील हुआ शहर बूचा मरघट में

रूसी सेना राजधानी कीव के

बूचा शहर पर कत्लेआम मचाया

रूसी सेना ने टैंकों से कुचल कुचल नरसंहार किया

कर बदसलूकी ले ली इज्जत महिलाओं की

ऐसा नरसंहार किया -ऐसा नरसंहार किया

ऐ रूसी-युक्रेन भूमि का टुकड़ा लेकर करोगे क्या

क्या खौफ नहीं अल्लाह का

जहां तुमने बच्चों महिलाओं जन जन का लहू बहाया

क्या खुदा बक्से का तुम्हें ,सोचो जरा सोचो

रूसी सेना राजधानी कीव के

बूचा शहर पर कत्लेआम मचाया

खोदा 45 फिट लंबा कब्रगाह

सैकड़ों लोगों को दफनाया-सैकड़ों लोगों को दफनाया

क्यों कर रहे 42 दिनों से नरसंहार

अब तो हो जाओ होशियार

रूसी सेना राजधानी कीव के

बूचा शहर पर कत्लेआम मचाया-कत्लेआम मचाया।"

पर्यावरण- पर्यावरण बचाना है

पर्यावरण बचाना है -पर्यावरण बचाना है

धरा स्वच्छ बना- पर्यावरण बचाना है

हाथ से हाथ मिला वादा यह करते हैं

प्रदूषण दूर कर -पर्यावरण बचाना है

पर्यावरण से मिलती हमें सासें

आओ मिलकर पेड़ लगाएं

नदियों झीलों को करे स्वच्छ- मिलता निर्मल नीर है

पर्यावरण बचाना है- पर्यावरण बचाना है

वाहनों का करे कम उपयोग, वायुमंडल स्वच्छ बनाना है

तेजल धानी पर लगाकर विराम, ध्वनि प्रदूषण से बचाना है

पर्यावरण बचाना है -सबको स्वस्थ्य बनाना है

पर्यावरण बचाना है पर्यावरण बचाना है

 रंजना गोयल : बिहार प्रदेश बेतिया शाखा

कुछ विषय मन को भाया,

संस्कार शब्द दिमाग़ में आया,

कुछ जाना पहचाना सा था,

भूला बिसरा खोया सा था,

माँ ने शायद कुछ बतलाया था,

बड़ो का सम्मान सिखाया था,

जल्दी उठने का फ़र्ज़ समझाया था

पूजापाठ का एक जगह बताया था,

दानधर्म भी हाथों से करवाया था,

सेवा भाव की आदत भी डाली थी,

त्याग की भावना से नहलाया था,

ज़िंदगी का यही है पूर्ण ज्ञान पढाया था,

सारी बातें आँखों के सामने आया था,

ज़िन्दगी की आप धापी में जिसको भुलाया था,

आज अपने अंदर कहराते हुए पाया था,

इस बगिया को फिर से सीचने को मन ललचाया है

अब संस्कार शब्द पुरे वजूद में छाया है!!!!

कविता पोदार, पटना सिटी बिहार 

 

 

 

 🚩🚩🚩राष्ट्र चेतना🚩🚩🚩

राष्ट्र चेतना का अलख 

देशवासियों में जगाना है

सीमा पर डटे सैनिकों का

मनोबल हमें बढ़ाना है

देश दुश्मनों की मनसा को

हम सब मिल तोड़ देंगे

भारत मां की रक्षा हेतु

कोई भी प्रयास ना छोड़ेंगे

खून बहाया था जिन वीरों ने

मां का शीश बचाने को

व्यर्थ ना जाने देंगे हम

उन वीरों की कुर्बानी को

वीर सैनिकों की कुर्बानी को

थोड़ा तो तुम याद करो

भूले बिसरे चित्रों पर

तुम थोड़ा सा रंग आज भरो

1989 में कश्मीरी पंडितों संग हुआ था

जो घिनौना कर्म

भविष्य में ऐसा ना हो

इसलिए अपना लो राष्ट्र धर्म ।।"

 

प्रीति गोयनका,       बेतिया शाखा, बिहार प्रदेश, 9473333922


कितनी सुंदर प्रकृति हमारी, मगर हो रहा इसका विनाश

कट रहे हैं पेड़-पौधे, और हो रहा हरियाली का नाश || 

प्रकृति पर होता सित्तम, हमसे सहा नहीं जाता है

पर्यावरण के नष्ट होने से, वातावरण दूषित हो जाता है || 

नदियों, तालाबों, जंगलों और झरनों की हमको रक्षा करनी है

चारों ओर हरियाली फैलाकर, धरती सुरक्षित रखनी है|| 

जीवनदायिनी धरा की, अहमियत सबको समझाना है

विश्व में फैले वायुमण्डलीय प्रदूषण को मिटाना है || 

औद्योगिकरण के इस युग में, हिमनद सारी सुख जाएगी

तपती हुई धरा के विस्फोट से, प्रकृति नहीं बच पाएगी || 

पर्यावरण के महत्व को, हमको समझना होगा

प्राकृतिक साधनों के होते हुए, हनन को रोकना होगा।। 

प्रकृति का शृंगार है हरियाली

हरियाली ही हमारे जीवन में लाएगी खुशहाली। 

 

भारतीय संस्कृति

अनेकानेक उत्कृष्ट गुण हैं विद्यमान

भारतीय संस्कृति है बड़ी महान |

 

आध्यात्मिकता एवं भौतिकता का

विशिष्ट समन्वय है इसमें

त्याग , तपस्या, मोक्ष और कर्तव्यनिष्ठा

का पूर्ण समावेश है इसमें |

 

एकता, उदारता, सहनशीलता और

गतिशीलता कूट कूट कर भरी है। 

प्राकृतिक-प्रेम, सहिष्णुता और

समानता की सच्ची परिचायक है।। 

 

कल्याणकारी भावनाओं वाली संस्कृति,

मनुष्य और समाज के संबंध का आदर्श है। 

वैदिक साहित्य, संगीत , कला और

नारी सम्मान के लिए विख्यात है। 

 

ग्रहणशीलता और वैदिक परम्पराओं से जुड़ी हुई

विश्व की समस्त संस्कृतियों में श्रेष्ठतम है।

है सदैव प्रगतिशील रहनेवाली संस्कृति

बड़ी विलक्षण है हमारी भारतीय संस्कृति।।  

बिमला सर्राफ,

पूर्णिया, बिहार प्रदेश    

8969828969   

 

बुचा - नरसंहार

रूस द्वारा मानवता हुई शर्मसार,

फैलाया आतंक किया नरसंहार,

खूनखराबा को अंजाम देकर ,

शहर बूचा को किया तार-तार।

 

लाशों का लगा दिया ढेर,

सड़कें हुई सुनसान

40 दिन के खूनी खेल में ,

शहर बुचा बना कब्रिस्तान ।

 

बहुत खोया कुछ ना पाया,

दोनों को युद्ध रास ना आया,

क्षति हुई हर तरफ की,

प्रभाव विश्व पर भी है छाया।

 

जय- हिन्द"

बबीता डोकानिया,

पूर्णिया शाखा, बिहार प्रदेश

9631158628


संस्कार एवं संस्कृति

 

भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृतियों का मूलाधार है। 

संस्कृति से तात्पर्य प्राचीन काल से चले आ रहे संस्कारों से है। 

मनुष्य द्वारा लौकिक-पारलौकिक विकास के लिए किया गया आचार-विचार ही संस्कृति है। 

सनातन परंपरा के अनुरूप संस्कार की पद्धति ही संस्कृति है। 

संस्कृति अनुभवजन्य ज्ञान पर और सभ्यता बुद्धिजन्य ज्ञान पर आधारित है। 

सभ्यता से सामाजिक व आर्थिक जीवन प्रभावित होता है

जबकि संस्कृति से आध्यात्मिक जीवन। 

भारतीय संस्कृति सदैव अपने उदार गुणों के कारण पंथनिरपेक्ष रही है। 

यह उदात्ता व्यवहार की प्रतीक है। इसमें सहिष्णुता कूट-कूट कर भरी है। 

भारतीय संस्कृति प्रत्येक जाति व प्रत्येक व्यक्ति में सुसंस्कार उत्पन्न करती है। 

स्वामी विवेकानंद ने कहा है, 'यदि मनुष्य के पास संसार की प्रत्येक वस्तु है

लेकिन मानवता व धर्म नहीं है, तो क्या लाभ?' भारतीय संस्कृति अध्यात्मवादी है

देहात्मवादी नहीं। हमारी संस्कृति प्राचीनतम है। संस्कार अपने आप में अमूर्त होते हैं। 

ये व्यक्ति के आचरण से झलकते हैं। चरित्र निर्माण में धर्म व संस्कार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

सहिष्णुता, समन्वय की भावना, गौरवशाली इतिहास, संस्कार

रीति-रिवाज और उच्च आदर्शो के कारण भारतीय संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है। 

विवेक और ज्ञान भारतीय संस्कृति की आत्म भावना है।

 

उमा डोकानिया,

सहरसा शाखा, बिहार प्रदेश, 9470291605


फुलवारी

कलियों ने ली अंगड़ाई,

गुल खिले गुलशन-गुलशन

महक उठी फुलवारी.....

देख रे सखी री आई री 

बसंत ऋतु आई.....

सुनहरी ओढ़नी ओढ़ के

खेतों में पीली सरसों लहराई

मीठे-मीठे रस से भर गई

बगीची में अमराई....

देख रे सखी री आई री आई बसंत ऋतु आई......

मधुर संगीत कोकिल के गुंजे

पतझड़ का कर अंत 

बहार बन झुम उठी ऋतुओं की रानी....

देख रे सखी री आई री आई बसंत ऋतु आई

 

साहित्य प्रमुख 

"पायल अग्रवाल"

बिहार प्रदेश मुजफ्फरपुर शाखा

8544320267



पेड़ लगाओ

पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ

जीवन को हरा-भरा बनाओ

हम जो पेड़ लगाएंगे 

ऑक्सीजन ही पाएंगे 

जीवन सुखी बनाएंगे 

बीमारी दूर भगाएंगे

हर कोई जब एक पेड़ लगाए 

दुनिया में हरियाली छाए

आओ लेते हैं संकल्प 

पेड़ नहीं काटने देंगे 

एक एक सब पेड़ लगाकर

दुनिया को हरा भरा करेंगे

पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ 

जीवन को हरा-भरा बनाओ l"

 

-गुंजन वर्साने, पटना, बिहार. 

7979030830          


 "मेरी मां"

औ मां प्यारी मां मम्मा

नो महिना का सफर तय कर

तुने मुझे जन्म दिया ममता के आंचल मे बड़ा किया

सब गम से दूर रख नाजो से पाला।

औ मां प्यारी मां मम्मा

तेरी नज़रों से दुनिया देखी तुने हि जीना सिखाया

तुझसे से ही  ज़िंदगी तुझसे आत्मा 

तुझसे ही मेरा वजुद ।

औ मां प्यारी मां मम्मा

मां तु मेरी जननी है तु है तो मै हुं

मुझसे तो जिने का आधार

मै तो  तेरी परछाईं मात्र हुं ।

औ मां प्यारी मां मम्मा

तुम ही मेरी जननी हो

यह तो सोभागय मेरा

तेरे चरणों में हि हैं जनत मेरा ।

औ मां प्यारी मां मम्मा

 

 विनिता डालमिया   बौसी    बिहार प्रान्त  6203349148



 मत करो अच्छाई व शान्ति को  खत्म

"मत करो अच्छाई व शान्ति को  खत्म,                                         

मत दो इन्सानियत व बेगुनाहो को जख़्म।

 आग से आग बुझा सकते हो क्या?   

 दुषित दुर्गंध में सांस ले सकते हो क्या?                                      

 एक बात समझ नहीं आती है ये हिंसा क्यूँ हो जाती है,

रात अंधेरी होने पर मानवता क्यूँ सो जाती है।                 

खुदा तो तुम्हारे कर्म में है,  खुदा तो मानव धर्म में है।

 मत फैलाओ समाज में आतंक व हिंसा जो तेरा नाश कर देगी ,

 मत करो कूरता इतनी की धरती की छाती तेरा बोझ उठाने से इन्कार कर देगी।

 

अनिता डोकानिया, जयनगर, बिहार

9934949669



 *मानवता*

 

धर्म के नाम पर जान लेने को है तैयार

यह भगवान और खुदा से है कैसा प्यार?

मानव बड़ा ही बेशर्म हो गया है,

मानवता से बड़ा अब धर्म हो गया है।

 

धर्म ही मानव को मानवता का पाठ पढ़ाता है,

स्वार्थ, लालच और विचार हमसे गलत करता है।

धर्म को जाने, कर्म को जाने,

ईश्वर कण कण में हैं पहचाने।

मानवता ही बड़ा धर्म है, आओ मानवता को पहचाने।

 

मानवता से होगा जग उज्ज्वल,

मानवता में विश्वास रखो।

निर्माण करें हम प्रेम फूलो का,

मानवता को मानव से जोड़ें

मानवता ही बड़ा धर्म है,

आओ दिल से दिल जोड़ें।।

 

बिहार, बेगुसराय, रेखा खेमका 



 पता है मुझे...

तेरे बिन मैं कुछ नही हूँ

पर मैं सबकुछ होना चाहती  हूँ।।

मैं बिना वजह  हंसती हूं... मैं बिना  समझे बोलती हूं...

इसलिए कि  मैं खुश रहना चाहती  हूँ  ।।

बच्चों सी मासूमियत... मुस्कुराहट.. अपने खोए  बचपन को बचाकर रखना चाहती हूँ ।।

पता है मुझे  ....

मैं अच्छा  नृत्य नही करती हूँ

पर मैं आनंदित हूँ 

बिना ताल  मटकना चाहती हूँ।।

पता है मुझे...मैं सुंदर भी  नही हूँ।

लेकिन फिर भी मैं खुद को 

 संवारना चाहती हूँ।।

पता है अभी... मैं अच्छा नही लिखती  पर मेरा भी मन है... सबकुछ बताना चाहती हूँ।।

मेरे न रहने पर भी जो बाते जिंदा रहे..वो सब भी मैं  लिखना चाहती हूँ।।

किसी वजह से तो सब हंसते हैं...

पर मै बिना वजह  मुस्कुराना चाहती हूँ।।

*मैं कुछ नही हूँ पर सबकुछ होना चाहती हूँ*।।

स्वरचित 

बिहार, जोगबनी, मीना गोयल