Saturday, March 2, 2024

पुष्पांजली बिहार प्रान्त


पुष्पांजली बिहार प्रान्त

पुष्पांजली राजस्थान प्रान्त

 पुष्पांजली राजस्थान प्रान्त 

https://drive.google.com/file/d/1Zf_Z7yyWZCga6YhFpLdR9r2fVDYRhgwS/view?usp=sharing

पुष्पांजली असम प्रान्त

 पुष्पांजली असम प्रान्त 

https://drive.google.com/file/d/1zZDKzx_t-47Bai5j_kj_NN8_tS0ynUur/view?usp=sharing

पुष्पांजली छतीसगढ़

 पुष्पांजली छतीसगढ़ 

https://drive.google.com/file/d/1Kt_xAv4Lr9J9AduD7FCBBNPcEQ1PwtX3/view?usp=sharing

पुष्पांजली महाराष्ट्र प्रान्त

पुष्पांजली महाराष्ट्र प्रान्त 

https://drive.google.com/file/d/1uqm-kr57hdpt3pupnax1jxusb6xElAzM/view?usp=sharing


https://drive.google.com/file/d/1fz0Q-8zfK1AFZiDmW8BImmfDU6Aqt92t/view?usp=sharing


Saturday, February 17, 2024

झारखण्ड : काव्यांजली


 "नारी

 

जमाना बदला है दौर बदला है।

महिलाओं का हक और हौसला बदला है।

नहीं अब नारी किसी के आधीन।

अपने लिए जीना अपनी खुशी के लिए लड़ना 

वर्तमान युग की नारी की है पहचान.

 

बहुत कुछ बदला बहुत बदलना अभी बाकी है

संकुचित विचार संकीर्ण मानसिकता अब भी नारी को जंजीर से जकड़ी है.

 

जिस सम्मान और अधिकार की हकदार है

वह मिलना अभी बाकी है.

 

दूर है मंजिल अभी मीलों का सफर बाकी है.

स्वयं के अधिकारों के प्रति सजगता.

स्वयं के हित के लिए लानी होगी जागरूकता"

 

-कविता शर्मा           चाईबासा       झारखंड

 

 "अपगंता

मैं अपंग हूं

मेरी अपंगता पर मैं विवश हूं

पर मैं उड़ना चाहती 

चलना दौड़ना चाहती हूं।

पर मैं अपने पैरों से विवश हूं

समाज भी मुझे

 अपाहिजता का बोध करातीहैं

मैं आगे बढ़ना चाहती हूं 

पर दुनिया मुझे नकारा समझ कर

अंधकार में  धकेलना चाहती

मैं इस अंधकार से निकल कर 

स्वतंत्र जीवन जीना चाहती हूं

मुझे भीख नहीं

आगे बढ़ने की राह दिखाओ

मुझे सहारा नहीं

मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाओ

मैं स्वतंत्र होकर

दुनिया में घूमना चाहती हूं

मेरी अपंगता पर मुझे

विवशता का एहसास मत कराओ।।

 

औरत

इस युग में कृष्ण का

    इन्तजार मत कर द्रौपदी

घोर कलयुग की है 21वीं सदी

    आसुं से नहीं अंगारों से

   अपनी आंखें  भरनी है ।

कृष्ण के भेष में

     दुस्शासन घात लगाएं हैं

जिनसे आशा है हमको

     वह ईमान बेच कर बैठे हैं।

शस्त्र उठालो द्रौपदी

     नहीं और कुछ कर सकती

मेहंदी से नहीं

    तलवारो से  श्रृंगार करो

तुमको ही देने होगे

     अपराधियो को सजा

इस युग में जीना हैं

    तो स्वालम्बी बनो ।

 

प्रियंका चौधरी कटरस गढ़, झारखंड  

 

 

गौ संरक्षण     

ना काटो बैलों को मानव ,

कि धरती टूट जाएगी !

ये नन्दी वाहन है शिव का ,

कि भगवान रुठ जाएंगे !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

समर्पण है स्वभाव इनका ,

परिश्रम की मिसाल है ये !

ये संगी साथी मानव का ,

ये जीने का भी सहारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

है गोवंश धरती पर वरदान ,

किया ऋषियों ने इनका गान !

है गोबर गौमूत्र सर्वोत्तम ,

कि  पूजन योग्य माना है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

जूड़ा इनसे हमारा कर्म ,

जूड़ा इनसे हमारा धर्म !

तो जोड़ें क्यूं ना अपना मन ,

ये गौवंश ""कल"" हमारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

 पुष्पा   रूंगटाचाकुलिया शाखा, झारखण्ड

               

 "दर्द मजदूरों का

सिर पर बोझ पांव में छाले।

 इनके घर में रोटियों के लाले।।

 जुल्मों का बोझ भी संग में उठाते।

 मजदूरी के बाद भी आधा पेट भोजन पाते ।।

मजदूर थे ,मजदूर हैं ,मजदूर ही रह गए।

  मजबूरी के कारण हजारों सितम सह गए।।

बदल गया जमाना तुम भी बदल जाओ न।

 मजदूरों का समझो दर्द।

 ""औ"" हमदर्द बन जाओ न।।

 

रानी अग्रवाल          जमशेदपुर शाखा      झारखंड प्रदेश          9708557661

 

गौ संरक्षण      

ना काटो बैलों को मानव ,

कि धरती टूट जाएगी !

ये नन्दी वाहन है शिव का ,

कि भगवान रुठ जाएंगे !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

समर्पण है स्वभाव इनका ,

परिश्रम की मिसाल है ये !

ये संगी साथी मानव का ,

ये जीने का भी सहारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

है गोवंश धरती पर वरदान ,

किया ऋषियों ने इनका गान !

है गोबर गौमूत्र सर्वोत्तम ,

कि  पूजन योग्य माना है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

जूड़ा इनसे हमारा कर्म ,

जूड़ा इनसे हमारा धर्म !

तो जोड़ें क्यूं ना अपना मन ,

ये गौवंश ""कल"" हमारा है !

ना काटो बैलों को मानव !!

 

पुष्पा   रूंगटा

चाकुलिया शाखा

झारखण्ड 

 

 

 

पुष्पा रूंगटा

चाकुलिया शाखा

( झारखण्ड )"

 देश की शान "मजदूर"

 

कठोर परिश्रम के बल पर अपने

कठिन कर्म भी आसान करें वो

पथ की हर बाधा दूर कर हो अग्रसर

दुनिया में मज़दूर कहलाएँ वो 

रात दिन की परवाह किए बिना

लक्ष उनका मेहनत के बल पर 

मिट्टी से भी सोना उगा लेना 

मेहनत से इज्जत की दो वक्त की रोटी कमाएँ वो

दुनिया में मज़दूर कहलाएँ वो

अपनी जान जोखिम में डाल

सबके सपने साकार करता वो

खुद रूखी-सुखी खाकर रहता

सबके जीवन में ख़ुशियाँ लाए वो

दुनिया में मज़दूर कहलाएँ वो

 

झारखंड, धनबाद, संजू डालमिया 

 स्वच्छ पर्यावरण

आओ हम सब मिलकर पेड़ लगाएं

 सड़क किनारे छायादार बनाएं

खाली स्थानों पर पौधे लगाकर

पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं

नदियों में कचरा ना डालें

पानी स्वच्छ बनाएं

ऑटो रिक्शा एवं कार की जगह

साइकिल प्रयोग में लाएं

आओ हम सब मिलकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं

डिस्पोजल एवं प्लास्टिक का प्रयोग बंद कर हम

पत्तल एवं मिट्टी के बर्तन प्रयोग में लाएं

 इन सब चीजों का प्रयोग कर हम

धरती मां को स्वच्छ बनाएं

आओ हम सब पर्यावरण बचाएं

 

झारखंड, सरायकेला, रेखा सेकसरिया 

 

 

 एक भारत श्रेष्ठ भारत

 

क्या झारखण्ड, क्या बंगाल, क्या उत्तराखंड |

जब खड़ा हर एक भारतवासी अखंड |

 

नेताओं, बस करो! अब न फैलाओ सांप्रदायिक दंगे

याद रखो! हम सब हैं एक ही मालिक के बन्दे |

 

यूँ न फैलाओ चहुँ और वैचारिक लड़ाई

आखिर यह तो है भारत के लिए दुखदायी |

 

कुछ तो सबक लो- देख लो रूस और यूक्रेन की जंग

हर तरफ आज हो रहा बस दमन ही दमन |

 

याद करो इतिहास को- जब रफ़ी चाचा भी दिवाली मानते थे

राधा भी ईद की सेवइयां खाती थी

हमारी भारत माँ सोने की चिड़िया कहलाती थी |

..... सोने की चिड़िया कहलाती थी ||

 

औरत

इस युग में कृष्ण का

    इन्तजार मत कर द्रौपदी

घोर कलयुग की है 21वीं सदी

    आसुं से नहीं अंगारों से

   अपनी आंखें  भरनी है ।

कृष्ण के भेष में

     दुस्शासन घात लगाएं हैं

जिनसे आशा है हमको

     वह ईमान बेच कर बैठे हैं।

शस्त्र उठालो द्रौपदी

     नहीं और कुछ कर सकती

मेहंदी से नहीं

    तलवारो से  श्रृंगार करो

तुमको ही देने होगे

     अपराधियो को सजा

इस युग में जीना हैं

    तो स्वालम्बी बनो ।

 

झारखंड, खाटरस गढ़, प्रियंका चौधरी  

 

 

 तू जननी है

स्वयं को आंकती क्यों कम है?

यूं दीन हीन लाचार बनकर

थर-थर कांपती क्यों है?

 

बन रणचंडी तांडव मचा

कर मर्दन शत्रु  (बलात्कारी)का

रूप धर काली का

ले खड्ग हाथ में

अंत कर दुराचारी का...

 

बन दामिनी टूट शत्रु पर

इतिहास तभी रच पाओगी

*_बन  स्वयंसिद्धा_*

 फिर अनगिनत बालाओं की

प्रेरणा तुम बन जाओगी...

 

दिन बहुरेंगे तेरे भी फिर

आसमान से सूरज- चांद- तारे भी

नई रोशनी बरसाएंगे;

कलरव करते पंछी भी फिर

गीत नया गुनगुनाएंगे,

देखना फिर मुरली वाले मोहन भी

आसमान में मुस्काएंगे...!!!

 

 

झारखंड, रांची, सरोज गर्ग रत्नप्रभा

 

 *नारी*

*नारी हूं मैं नारी हूं*, सबकी मैं आभारी हूं।

घर सम्भालू तो  संसारी हूं, जो व्यापार संभालू तो व्यापारी हूं।

कुदरत की सर्वश्रेष्ठ कलाकारी हूं, हर बात की रखती जानकारी हूं।

मैं हर घर में खुशियों की किलकारी हूं।

*नारी मैं हूं मैं नारी हूं* ।

       हर गम को भुला दूं मैं हँसती  हँसती, मुझसे ही घर में खुशियां बस्ती।

कभी अबला तो कभी आदिशक्ति, ऐसी है हमारी कुछ अभिव्यक्ति। 

*नारी हूं मैं नारी हूं*, सबकी मैं आभारी हूं।

*धन्यवाद*

 

झारखंड, हजारीबाग, श्वेता सेठी

 

 

 माँ

माँ सबसे अटूट रिश्ता !! 

एक रिश्ता जिसमें माँ को कुछ बोलने की ज़रूरत नहीं 

बस वो आँखें पढ लेती है !! 

ज़िंदगी के हर मोड़ पर माँ ने मुझे आगे बडना सीखाया !! 

हर लड़ाई को positive mind के साथ लड़ना सीखाया !! 

हिम्मत ना हारना बस बेटा तू मेहनत कर !! 

गलती पर डाँटना!! घर को संवारना !! 

हर एक activity में मुझे involve करना सीखया!! 

Love, concern n affection की तो वो एक मूरत थी!! 

माँ तू आज नहीं है!! पर तेरी परवरिश मेरे साथ हमेशा रहेगी!! 

I love you maa!! We all miss u a lot maa!!  MAA 🙏❤️ 

 

झारखंड, जमशेदपुर, किरण देबुका 

 

संस्कार

 इंसान अपने जीवन में पैसे के महत्व को इतना बढ़ा लिया है कि बाकी चीजे उसके लिये महत्वहीन हो चुकी हैं. अच्छे संस्कार से बच्चे का चरित्र निर्माण होता है. इससे बच्चा जीवन में सफलता पाता है. बुढ़ापे में माता-पिता की सेवा करता है. दान-पूण्य, जरूरत मंदों की मदत करता है. संस्कार अच्छे होने से मनुष्य के विचार सकारात्मक होते है. जीवन में हार, दुःख, कठिनाई होने के बावजूद भी आप निराश नही होते है. आप वही आचरण करें, जैसा आप अपने बच्चे से चाहते है.

 

सन्तान न हो तो पूरे जीवन में सिर्फ एक दुःख होता है,

संतान संस्कारविहीन हो तो पूरा जीवन ही दुःख होता है.

 

जिनके संस्कार अच्छे होते है,

वो किसी का दिल नही दुखाते है,

चाहे प्यार में हो या मजाक में हो.

 

जो बच्चों को सिर्फ पैसा कमाना सिखाते है,

वही माँ-बाप बुढ़ापा अकेलेपन में बिताते है. 

 

झारखंड, साहिबगंज, रेनू तमाखुवाला 

 

 *किरदार*

 

*मेरी निष्ठा,मेरे समर्पण के इजहार से खुशबू आये।*

*मैं चाहती हूं कि मेरे किरदार से खुशबू आये।*

 

 बातें करती हूँ सबसे मुस्कुरा के मगर।

दिल से किसी की बात को लगाया नहीं मैनें !।

 

चल रही हूं मैं दुनिया के उसूलों पर मगर ।

 ईमान कभी अपना डिगाया नहीं मैनें।।

 

गलतियाँ भी हुई है मुझ से बहुत सी मगर।

 किसी और को ज़िम्मेदार कभी ठहराया नहीं मैनें!।

 

खुशियॉं चुराकर किसी और के दामन से।

क़िस्मत को कभी अपनीं  सजाया नहीं मैनें !।

 

किसी का साथ मिले ना मिले ।

पर ख़ुद को सफर में थकाया नहीं मैनें !।

 

  दोस्त बहुत से हैं मेरे इस ज़माने में।

 दोस्ती का रिश्ता दिल से निभाया है मैनें!।

 

दिल में कुछ और जुबॉं पे कुछ और।

जीने का ये सलीक़ा कभी अपनाया नहीं मैनें !।

 

भले ही ना दी हो खुशियॉं  किसी के लबों को।

पर किसी की आँखों को  भिगोया नहीं मैनें!।

 

सुख, दुख के पल हों ,या उदासी के भंवर।

ख़ुद पर से विश्वास कभी हटाया नहीं मैनें !।

 

 

*दिल से लिखे इस हर एक अशआर से खुशबू आये*।

*मैं चाहती हूं कि मेरे किरदार से खुशबू आये।।*

 

झारखंड, जमशेदपुर, संगीता मित्तल

 

 

 

 

 "" जिंदगी ""

 

जिंदगी से बड़ी, कोई सजा ही नहीं,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं।

इतने हिस्सों में ,बट गई हूं मैं ,

मेरे हिस्से में तो , कुछ बचा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी  ,कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

चाहे सोने के फ्रेम में , जड़ दो ,

"आईना" झूठ , बोलता ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

धन के हाथों , बिक गए हैं सभी ,

अब किसी जुल्म की , कोई सजा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है , कुछ पता ही नहीं ।

सच घटे या बड़े, तो सच-सच ना रहे ,

"यारो" - झूठ की तो कोई ," इंतेहा " ही नहीं, इंतेहा ही नहीं 

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है ,कुछ पता ही नहीं ।। 

 

झारखंड, जमशेदपुर, मीना अग्रवाल 

 

 मातृ दिवस पर विशेष 

बच्चो के मुख से

आज मेरा 6 साल का पोता अद्वित मेरे पास खेल रहा था

खेल खेल में मैने उसे पुछा, बेटा बडे होकर तुम क्या बनोगे!!!!

उसने बडे मासूमियत से हाजिर जवाब दिया

 '''''कुछ नहीं बनूँगा, मै बडे होकर आराम करूँगा। 

मैने बहुत विस्मित होकर पुछा ''

''क्यूँ ?

तो उसने पुन: जवाब दिया: क्यूँकि अभी तो मुझे आराम करने का वक्त ही नहीं मिलता,

सुबह से मेरी मम्मा मुझे स्कूल फिर ट्यूसण,

डांस टीचर ड्रॉइंग टीचर आ जाते हैं और मै थक जाता हूँ,

एक मिनट भी आराम करने का वक्त ही नहीं मिलता।

बाल सुलभ मुख से सहज भाव से बोली बाते मेरे हृदय को छू गई।

 

 झारखंड, गिरिडीह, तुलिका सरावगी 

माँ की महिमा 

माँ की महिमा सबसे न्यारी 

दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती बनकर घर मे प्रकाश फैलाये 

माँ की शक्ति बड़ी निराली हर आंगन महकाये

माँ बहन पत्नी बनकर, घर मे अपने प्यार बरसाये । 

 

सबका ध्यान रखे तनमन से घर आंगन को महकाये।

नारी शक्ति बनके  जनजन मे जाग्रति फेलाये ।

हर जुग हर क्षेत्र मे नारी ऐसा काम करे 

 

इसलिए माॅ आदि शक्ति कहलाये

प्यार भरा घर संसार बनाये 

माॅ की गरिमा सबसे न्यारी 

माॅ की महिमा सबसे प्यारी ।

 

झारखंड, चाकुलिया, लता लोधा 

 

 

 

 

 किताब

 

गुरुओं की गुरु है यह,

आचार्यों की है आचार्य।

हर एक को दिया है ज्ञान,

चाहे आर्य हो या अनार्य।

 

जीवन मार्ग करती है प्रशस्त

टूटता मनोबल करती है सशक्त,

अज्ञान के तम में दिया है,

भ्रांति को यथार्थ सेजिया है।

 

रूढ़िवादी दासता से दिलाती है मुक्ति,

कैसी भी हो उलझन, देती है युक्ति।

 

फूलों सी कोमल ता, इत्र सा पसराव।

बूझो तो कौन???

 

जीवन की सच्ची साथी किताब मैं किताब।

 

झारखंड, जमशेदपुर, पुष्पा संगी

 

 

  मां

आज सपने में मां आई थी

बोली कुछ नहीं बस मुस्कुराई थी

सोचा अपनी आपबीती सुनाऊं

जीवन की उथल पुथल बतलाऊं

 

जब तुम पास थी मेरे , मैं तुम्हें समझ नही पाई

आज जब खुद मां बनी ,तब तुम्हारी याद आई

 

कैसे करती थी तुम मुझे भी सिखाना

खुद को भुला कर जिंदगी बिताना

बच्चों की परवरिश मां का फर्ज होता है

आज समझी कि वो एक कर्ज होता है

 

अब मुझे भी ये कर्ज चुकाना है

अपने बच्चों के सुखद भविष्य का आधार बनाना है

 

जानती हूं कभी तुम अब वापस नही आओगी

मुझसे तो बस अब सपनों में ही मिल पाओगी

पर वो मां है सब जान गई

बेटी का दर्द पहचान गई

 

फिर माँ ने मुझको गले लगाया

तो इस बात पे यकिं आया 

कि दुनिया में इतना सुकून कहीं नहीं है

अगर स्वर्ग है कहीं तो बस यहीं है यहीं है 💔😞🤱

 

झारखंड, जमशेदपुर, ऋतू नागेलिया 

 

 

 मेरी सहेलियां 

 

कितनी प्यारी होती है सहेलियां, कितनी अनोखी होती है सहेलियां । 

हर रोज सहेलियों से मिलने का बहाना ढूंढा करते थे,

कहा गए वो दिन ...आज भी हम अपनी सहेलियों को ढूंढा करते है। 

 

मां बहन दादी चाची से जो बात बताने में कतराते थे। 

कितनी आसानी से यह बात अपनी सहेलियों से कह पाते थे। 

बचपन के सहेलियां आज भी याद आती है...

जब कभी आंखें बंद करूं तो वही बातें याद आती है।   

कब एक एक करके बिछड़ते चले गए,

पत्नी भाभी चाची आंटी न जाने क्या क्या कहलाने लग गए।

 

बचपन कब बीत गया सहेलियों वाला शब्द भूलते चले गए । 

आज भी सहेलियों के लिए दिल का एक कोना खाली है... 

कितनी याद आती है जब एक साथ हम खेला करते थे। 

कहा गया वो बचपन जो हर वक्त सहेलियों को ढूंढा करते थे।

 

कितनी प्यारी होती है सहेलियां , कितनी अच्छी होती है यह सहेलियां।।।

सारी सहेलियों को समर्पित।

 

 

झारखंड, जमशेदपुर, बबिता भावसिंहका 

 

 "" जिंदगी ""

 

जिंदगी से बड़ी, कोई सजा ही नहीं,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं।

इतने हिस्सों में ,बट गई हूं मैं ,

मेरे हिस्से में तो , कुछ बचा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी  ,कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

चाहे सोने के फ्रेम में , जड़ दो ,

"आईना" झूठ , बोलता ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है, कुछ पता ही नहीं ।

धन के हाथों , बिक गए हैं सभी ,

अब किसी जुल्म की , कोई सजा ही नहीं ।

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है , कुछ पता ही नहीं ।

सच घटे या बड़े, तो सच-सच ना रहे ,

"यारो" - झूठ की तो कोई ," इंतेहा " ही नहीं, इंतेहा ही नहीं 

जिंदगी से बड़ी , कोई सजा ही नहीं ,

और क्या जुल्म है ,कुछ पता ही नहीं ।। 

 

झारखंड, जमशेदपुर, मीना अग्रवाल